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शनिवार, 21 मार्च 2009

शेर का बाघों को सलाम

अंतरराराष्ट्रीय क्रिकेट में कुल 85 शतकों के साथ शिखर पर खड़े क्रिकेट जगत का शेर सचिन तेंदुलकर ने न्यूजीलैंड के खिलाफ शुरुआती टेस्ट की पहली पारी में 160 रनों की धमाकेदार पारी खेलकर भारतीय टीम को 520 रनों के मजबूत स्कोर पर ला खड़ा किया और न्यूजीलैंड पर 33 वर्षो के सुखे को समाप्त करते हुए टेस्ट श्रृंखला में निर्णायक बढ़त दिला दी। न्यूजीलैंड के खिलाफ बनाए गए अपने शानदार 42वें टेस्ट शतक को उतने ही शानदार जानवर ‘बाघ’ को समर्पित कर दिया है। तेंदुलकर ने कहा कि वो टीम इंडिया के साथ मिलकर बाघों को बचाना चाहते हैं। सचिन ने इसके बाद कहा, “मैं अपने इस शतक को बाघ संरक्षण को समर्पित करता हूं क्योंकि इस दौरे के शुरु में ही पूरी टीम ने यह फैसला किया था। मैंने इस सिलसिले में कई संदेश भी दिए हैं, इसलिए मैं इस शतक को देश में बाघ संरक्षण को समर्पित करता हूं”।
सचिन ने कहा, 'जब मैं छोटा था तब मुझे बताया गया था कि डाइनासौर नाम का एक जंतु होता है। कल शायद हम आने वाली पीढ़ी को बाघ के बारे में इसी तरह बताएंगे। बाघों को हमारे जंगलों से लुप्त होने से बचाने के त्वरित उपाय करने होंगे।' उन्होंने कहा, 'मैं इस क्षेत्र का विशेषज्ञ तो नहीं हूं लेकिन मेरा मानना है कि बाघों को जंगल में निर्बाध रहने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। जिस तरह हम अपने घरों में रहते हैं, जंगल ही बाघ का घर हैं। हमें पर्यावरण का संतुलन नहीं बिगाड़ना चाहिए।' अपने संदेश में उन्होंने कहा था कि यह नायाब प्रजाति भारत की समृद्ध और विविध वन्य जीव विरासत की द्योतक है। हमें यह सुनिश्चित करना ही होगा कि यह शानदार जानवर खत्म न होने पाए।
सचिन ने पहले टेस्ट की पूर्व संध्या पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान भी भारत में बाघों की घटती संख्या पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा, ' सदी की शुरुआत में भारत में 40000 बाघ थे। आज यह संख्या घटकर 1700 रह गई है और हर महीने एक बाघ कम हो रहा है। बाघों के शिकार की बढ़ती घटनाएं भी चिंता का सबब है।'
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत में बाघों की तेजी से घटती संख्या को रोकने की दिशा में कुछ किया जाए, नहीं तो हमारे राष्ट्रीय पशु का अस्तित्व ही मिट जाएगा।
गौरतलब है कि बाघ दुनिया में सबसे तेजी से लुप्त होने वाले पशुओं में शामिल है। 20वीं सदी की शुरुआत में धरती पर बाघों की संख्या लगभग एक लाख थी, लेकिन अब दुनिया में लगभग 2,500 बाघ ही जीवित हैं।
अब देखने वाली बात ये है कि शिक्षित एवं संवेदनशील समाज तो बाघ के संरक्षण के प्रति चिंतित हो गयी है लेकिन ये कितने प्रतिशत लोग है। असली सलाम तो बाघों को तब मिलेगा जब किसी बाघ की मौत हमारे कारण न हो एवं बाघों के संवर्धन के प्रति विश्व समुदाय का शत-प्रतिशत आवादी समर्पित हो जाय। सचिन तेन्दुलकर के बाघों के संरक्षण के लिए आगे आने से बाघों के संरक्षण को काफी बल मिलेगा। एक बड़ा प्रशंसक वर्ग उनका अनुसरण कर बाघ संरक्षण को अंगीकार करेगा।
सचिन तेंदुलकर के इस मिशन को हिन्दुस्तान की जनता की तरफ से मेरा सलाम!

3 पाठक टिप्पणी के लिए यहाँ क्लिक किया, आप करेंगे?:

अक्षत विचार ने कहा…

tendulkar sachmuch tusi great ho..

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

सचिन को सलाम!

संगीता पुरी ने कहा…

सचिन तेंदुलकर के इस मिशन को हिन्दुस्तान की जनता की तरफ से मेरा सलाम!

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